नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का उद्घाटन किया. इस नई इमारत का नाम ‘सेवा तीर्थ' रखा गया है. इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय हैं, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर थे. सेवा तीर्थ की इस बिल्डिंग पर देवनागरी लिपि में ‘नागरिक देवो भव' लिखा गया है. पीएम ने इस मौके पर कहा कि ये स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि नाम बदलने की पहल केवल शब्दों का बदलाव नहीं है. इन सभी प्रयासों के पीछे वैचारिक सूत्रता एक ही है- 'स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान, गुलामी से मुक्त निशान'. उन्होंने कहा कि नए प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम 'सेवा तीर्थ' है. सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है.
ये पहली बार नहीं है, जब सरकार ने किसी प्रमुख स्थल या भवन के नाम बदले हैं. इससे पहले भी कई प्रमुख स्थानों के नए नाम रखे गए हैं.
- साउथ ब्लॉक → सेवा तीर्थ
- केंद्रीय सचिवालय → कर्तव्य भवन
- राजपथ → कर्तव्य पथ
- रेस कोर्स रोड → लोक कल्याण मार्ग
- राज भवन/राज निवास → लोक भवन/लोक निवास
आजादी के बाद भी गुलामी के प्रतीकों को ढोया जाता रहा- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा है कि विकसित भारत की यात्रा में यह बहुत जरूरी है कि भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर आगे बढ़े. दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद भी हमारे यहां गुलामी के प्रतीकों को ढोया जाता रहा. 2014 में देश ने औपनिवेशिक और दासात्मक मानसिकता के अवशेषों से मुक्ति पाने का संकल्प लिया. हमने गुलामी की मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया. हमने वीरों के नाम पर नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया. हमने पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया. रेसकोर्स का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया. यह केवल नाम बदलने का निर्णय नहीं था, यह सत्ता के मिजाज को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था.
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